EN: birth in the Pure Land, doesn't this verge on having one's attention divided?
HI: के म घर नफर्किने?
HI: क्या हमारे नसीब में सिर्फ निकाह के छुहारे होंग
HI: क्या पुण्य बस किसी का दिल न दुखे
HI: क्या मिरी तक़दीर में मंज़िल नहीं
HI: जहां में अकेले हमीं तो नहीं
HI: क्यों रह जाते हैं एकाकी
HI: फैमिली में अकेली हैं तो क्या न करें
HI: आज अकेले क्यों रह जाते
HI: इक ठिकाने पर ठहरता क्यों नहीं
HI: क्यूँ रहती हो अकेली
HI: क्या हमारा दिल एक हीं बात पर नहीं रोता,
HI: जुनूँ की बात छोड़ों इस गए घर का ठिकाना क्या
HI: वह मोहोब्बत ही क्या जिसमे यादें न हो,
HI: संझा--चद्दरि पर नहिं तँ माँथ पर?